
बल्लेबाजी का नया किंग-हरभजन सिंह
अहमदाबाद के सरदार वल्लभ भाई पटेल स्टेडियम में भारत और न्यूजीलैण्ड के बीच गत 4 से आठ नवंबर तक खेले गए पहले टेस्ट मैच की दूसरी पारी में 65 रन पर छह विकेट खोकर संकट में फंसी टीम इंडिया को संकट से निकालने वाले फिरकी गंेदबाज हरभजन सिंह, बल्लेबाजी के नए किंग के रूप में सामने आए हैं। इन्होंने वेरी-वेरी स्पेशल लक्ष्मण के साथ सातवे विकेट के लिए रिकॉर्ड 163 रनों की सांझेदारी निभाई वहीं टेस्ट कॅरियर का पहला सैंकड़ा भी जमा डाला।टर्बनेटर के नाम से मषहूर भज्जी पाजी ने आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए मैच की पहली पारी में भी 69 रन बनाए। इस तरह उन्होंने इस क्रम पर खेलते हुए एक पारी में अर्द्धषतक और दूसरी पारी में शतक बनाने वाले दुनिया के दूसरे बल्लेबाज बनने का श्रेय प्राप्त किया। इससे पूर्व 1935 में दक्षिण अफ्रीका के ई डॉल्टन ने आठवें बल्लेबाज के रूप में बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैण्ड के विरूद्ध दोनों पारियों में क्रमशः 117 और 57 रन बनाए थे। अपनी बेहतरीन पारियों के कारण मैन ऑफ द मैच का खिताब जीतने वाले हरभजन सिंह ने कॅरियर के 88वें टेस्ट मैच में शतकों के सूखे को भी खत्म कर दिया। हरभजन सिंह, भारत के अनिल कुंबले (118), श्रीलंका के चामिण्डा वास (97) के बाद सर्वाधिक टेस्ट मैच खेलकर पहला शतक बनाने वाले विष्व के तीसरे खिलाड़ी बने।हरभजन सिंह मुष्किल घड़ियों में संकटमोचक गेंदबाज बनकर उभरते हैं इसमें कोई अतिष्योक्ति नहीं है लेकिन इस बार उनकी बल्लेबाजी का ऐसा जादू चला कि कीवियों की बोलती बंद हो गई और मेहमान टीम के कप्तान डेनियल विटोरी ने जीत छीनने का ठीकरा भज्जी के सिर फोड़ने में कोताही नहीं की। तीन जुलाई 1980 को पंजाब के जालंधर में जन्मे हरभजन सिंह को मार्च 2001 में कोलकाता के ईडन गॉर्डन मैदान पर मुष्किल परिस्थितियों में टैस्ट क्रिकेट की हैट्रिक करने वाले पहले भारतीय गेंदबाज होने का गौारव प्राप्त हुआ।गांगुली की कप्तानी में कंगारूओं के खिलाफ 2001 में खेली गई गावस्कर-बॉर्डर ट्रॉफी के मुकाबले के दौरान अनिल कुंबले के चोटिल होने के बाद हरभजन को बुलाया गया और हरभजन ने तीन मैचों की श्रृंखला में रिकॉर्ड-दर-रिकॉर्ड कायम कर टीम में न सिर्फ अपना स्थान पक्का कर लिया बल्कि टीम की अनिवार्य आवष्यकता बन गए। हरभजन को 2003 में अर्जुन पुरस्कार और 2009 में पद्मश्री अवार्ड से नवाजा जा चुका है। वे टेस्ट क्रिकेट में अनिल कुंबले (619) के बाद सर्वाधिक विकेट लेने वाले भारतीय स्पिनर गेंदबाज हैं।हरभजन अब तक 88 टेस्ट मैचों में आठ अर्द्धषतकों और एक शतक की मदद से 1785 रन बना चुके हैं वहीं बतौर गंेदबाज 161 पारियों में 369 बार बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखा चुके हैं। एक पारी में 24 बार पांच और एक मैच में पांच बार दस या उससे अधिक विकेट चटखा, विपक्षी बल्लेबाजों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। सत्रह अप्रैल 1998 को न्यूजीलैण्ड के खिलाफ अपने एक दिवसीय कैरियर की शुरूआत करने के बाद हरभजन खेल के इस प्रारूप में अब तक 212 मैचों में 242 विकेट ले चुके हैं वहीं बल्लेबाजी में करते हुए एक हजार से अधिक अंतर्राष्ट्रीय रन भी ठोंक चुके हैं। क्रिकेट के नवीनतम संस्करण टी-20 में भी भज्जी का प्रदर्षन सराहनीय रहा है। वे अब तक खेले गए 70 टी-20 मुकाबलों में 61 खिलाड़ियों को पवेलियन भेज चुके हैं और 405 रन बनाकर अपनी आलराउण्डर क्षमता का प्रदर्षन कर चुके हैं।तीस वर्ष का यह राइट आर्म ऑफ ब्रेक बॉलर सिडनी में खेले गए टेस्ट मैच के दौरान साइमंड्स के साथ हुए विवाद और आईपीएल के दूसरे संस्करण में साथी गेंदबाज एस श्रीसंथ के साथ हुई घटना के बाद सुर्खियों में रहा लेकिन इसकी प्रतिभा ने उन विवादों को पीछे छोड़कर खेल के हर विभाग में अपना सिक्का जमा दिया। हरभजन अब तक तीन श्रृंखलाओं में मैन ऑफ द सिरीज के सम्मान से नवाजे जा चुके हैं वहीं छह अवसरों पर मैन ऑफ द मैच का खिताब भी हासिल किया है।आईपीएल की मुंबई इंडियस टीम के सदस्य हरभजन काउंटी टीम सर्रे की ओर से खेल चुके हैं। टर्न के लिए मषहूर भारतीय उपमहाद्वीप की पिचों पर अगले वर्ष होने वाले विष्वकप के लिहाज से हरभजन भारत के लिए तुरूप का पत्ता साबित होगा इसमें कोई अतिष्योक्ति नहीं है। वैसे इस ऊर्जावान गेंदबाज में अभी बहुत क्रिकेट बाकी है और सफलता प्राप्त करने की भूख बरकरार रहती है तो यह सर्वकालिक महान गेंदबाजों की सूची में शामिल हो जाएगा और भारत की एक अदद आलराण्डर की तलाष भी पूरी होती दिखेगी, यह कहना भी गलत नहीं होगा।
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