Wednesday, 10 November 2010



बल्लेबाजी का नया किंग-हरभजन सिंह


अहमदाबाद के सरदार वल्लभ भाई पटेल स्टेडियम में भारत और न्यूजीलैण्ड के बीच गत 4 से आठ नवंबर तक खेले गए पहले टेस्ट मैच की दूसरी पारी में 65 रन पर छह विकेट खोकर संकट में फंसी टीम इंडिया को संकट से निकालने वाले फिरकी गंेदबाज हरभजन सिंह, बल्लेबाजी के नए किंग के रूप में सामने आए हैं। इन्होंने वेरी-वेरी स्पेशल लक्ष्मण के साथ सातवे विकेट के लिए रिकॉर्ड 163 रनों की सांझेदारी निभाई वहीं टेस्ट कॅरियर का पहला सैंकड़ा भी जमा डाला।टर्बनेटर के नाम से मषहूर भज्जी पाजी ने आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए मैच की पहली पारी में भी 69 रन बनाए। इस तरह उन्होंने इस क्रम पर खेलते हुए एक पारी में अर्द्धषतक और दूसरी पारी में शतक बनाने वाले दुनिया के दूसरे बल्लेबाज बनने का श्रेय प्राप्त किया। इससे पूर्व 1935 में दक्षिण अफ्रीका के ई डॉल्टन ने आठवें बल्लेबाज के रूप में बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैण्ड के विरूद्ध दोनों पारियों में क्रमशः 117 और 57 रन बनाए थे। अपनी बेहतरीन पारियों के कारण मैन ऑफ द मैच का खिताब जीतने वाले हरभजन सिंह ने कॅरियर के 88वें टेस्ट मैच में शतकों के सूखे को भी खत्म कर दिया। हरभजन सिंह, भारत के अनिल कुंबले (118), श्रीलंका के चामिण्डा वास (97) के बाद सर्वाधिक टेस्ट मैच खेलकर पहला शतक बनाने वाले विष्व के तीसरे खिलाड़ी बने।हरभजन सिंह मुष्किल घड़ियों में संकटमोचक गेंदबाज बनकर उभरते हैं इसमें कोई अतिष्योक्ति नहीं है लेकिन इस बार उनकी बल्लेबाजी का ऐसा जादू चला कि कीवियों की बोलती बंद हो गई और मेहमान टीम के कप्तान डेनियल विटोरी ने जीत छीनने का ठीकरा भज्जी के सिर फोड़ने में कोताही नहीं की। तीन जुलाई 1980 को पंजाब के जालंधर में जन्मे हरभजन सिंह को मार्च 2001 में कोलकाता के ईडन गॉर्डन मैदान पर मुष्किल परिस्थितियों में टैस्ट क्रिकेट की हैट्रिक करने वाले पहले भारतीय गेंदबाज होने का गौारव प्राप्त हुआ।गांगुली की कप्तानी में कंगारूओं के खिलाफ 2001 में खेली गई गावस्कर-बॉर्डर ट्रॉफी के मुकाबले के दौरान अनिल कुंबले के चोटिल होने के बाद हरभजन को बुलाया गया और हरभजन ने तीन मैचों की श्रृंखला में रिकॉर्ड-दर-रिकॉर्ड कायम कर टीम में न सिर्फ अपना स्थान पक्का कर लिया बल्कि टीम की अनिवार्य आवष्यकता बन गए। हरभजन को 2003 में अर्जुन पुरस्कार और 2009 में पद्मश्री अवार्ड से नवाजा जा चुका है। वे टेस्ट क्रिकेट में अनिल कुंबले (619) के बाद सर्वाधिक विकेट लेने वाले भारतीय स्पिनर गेंदबाज हैं।हरभजन अब तक 88 टेस्ट मैचों में आठ अर्द्धषतकों और एक शतक की मदद से 1785 रन बना चुके हैं वहीं बतौर गंेदबाज 161 पारियों में 369 बार बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखा चुके हैं। एक पारी में 24 बार पांच और एक मैच में पांच बार दस या उससे अधिक विकेट चटखा, विपक्षी बल्लेबाजों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। सत्रह अप्रैल 1998 को न्यूजीलैण्ड के खिलाफ अपने एक दिवसीय कैरियर की शुरूआत करने के बाद हरभजन खेल के इस प्रारूप में अब तक 212 मैचों में 242 विकेट ले चुके हैं वहीं बल्लेबाजी में करते हुए एक हजार से अधिक अंतर्राष्ट्रीय रन भी ठोंक चुके हैं। क्रिकेट के नवीनतम संस्करण टी-20 में भी भज्जी का प्रदर्षन सराहनीय रहा है। वे अब तक खेले गए 70 टी-20 मुकाबलों में 61 खिलाड़ियों को पवेलियन भेज चुके हैं और 405 रन बनाकर अपनी आलराउण्डर क्षमता का प्रदर्षन कर चुके हैं।तीस वर्ष का यह राइट आर्म ऑफ ब्रेक बॉलर सिडनी में खेले गए टेस्ट मैच के दौरान साइमंड्स के साथ हुए विवाद और आईपीएल के दूसरे संस्करण में साथी गेंदबाज एस श्रीसंथ के साथ हुई घटना के बाद सुर्खियों में रहा लेकिन इसकी प्रतिभा ने उन विवादों को पीछे छोड़कर खेल के हर विभाग में अपना सिक्का जमा दिया। हरभजन अब तक तीन श्रृंखलाओं में मैन ऑफ द सिरीज के सम्मान से नवाजे जा चुके हैं वहीं छह अवसरों पर मैन ऑफ द मैच का खिताब भी हासिल किया है।आईपीएल की मुंबई इंडियस टीम के सदस्य हरभजन काउंटी टीम सर्रे की ओर से खेल चुके हैं। टर्न के लिए मषहूर भारतीय उपमहाद्वीप की पिचों पर अगले वर्ष होने वाले विष्वकप के लिहाज से हरभजन भारत के लिए तुरूप का पत्ता साबित होगा इसमें कोई अतिष्योक्ति नहीं है। वैसे इस ऊर्जावान गेंदबाज में अभी बहुत क्रिकेट बाकी है और सफलता प्राप्त करने की भूख बरकरार रहती है तो यह सर्वकालिक महान गेंदबाजों की सूची में शामिल हो जाएगा और भारत की एक अदद आलराण्डर की तलाष भी पूरी होती दिखेगी, यह कहना भी गलत नहीं होगा।

Tuesday, 9 November 2010



seemavarti ke naye ank mein chapa mera article

Tuesday, 2 November 2010


seemavarti patrika ke naveentam ank mein prakashit aalekh 'Do Sadiyon Ka Mahaantam Khiladi'

Thursday, 21 October 2010



कोहली ने दिलाई ‘विराट’ जीत


बुधवार को विशाखापतनम के राजशेखर रेड्डी स्टेडियम में भारत और आस्ट्रेलिया के बीच खेले गए एकदिवसीय मुकाबले में कोहली की विराट पारी के आगे कंगारू नतमस्तक हो गए। भारतीय पारी की शुरूआत में दो बल्लेबाजों को पेवेलियन भेजकर ख़ुशी मना रहे कंगारूओं की खुशी तब काफूर हो गई जब रैना और कोहली की जोड़ी ने उनकी मांद में से जीत निकाल ली। पहले बल्लेबाजी करने उतरी मेहमान टीम के बल्लेबाजों ने माइकल क्लार्क के 111, माइक हंसी के 69 और कैमरून व्हाइट के 89 रनों की मदद से 289 रन का स्कोर खड़ा कर दिया जवाब में उतरी भारतीय टीम के दो बल्लेबाजों धवन और मुरली विजय के सस्ते में निपट जाने के कारण उनके लिए लक्ष्य प्राप्त करना मुष्किल दिखने लगा लेकिन पहले ही ओवर में कमान संभालने के बाद विराट कोहली ने पीछे नहंी देखा और पहले युवराज और फिर रैना के साथ खेली गई साहसिक पारी की बदौलत न सिर्फ कैरियर का तीसरा शतक पूरा किया बल्कि भारत के जीत की नींव रखी। विराट कोहली ने 119 रन बनाए। इसके लिए उन्हें मेन ऑफ द मैच के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। युवराज सिंह ने 58 और रैना ने 71 रनों का सहयोग दिया। वैसे इसे युवराज की सुखद घर वापसी कहा जा सकता है। दूसरी और षिखर धवन, मुरली विजय और कप्तान धोनी ने बुधवार को निराष किया। वे जीत में बड़ा सहयोग नहीं दे सके। कंगारू गंेदबाजों में अनुभव की कमी स्पष्ट देखी जा सकती थी। वे भारतीय बल्लेबाजों को रोक पाने में अक्षम दिखाई दे रहे थे। अंतिम समय में सौरभ तिवारी ने भी कुछ गंेदे जाया की मगर कैरियर का पहला मैच देखते हुए उन पर अंगुली उठाना उचित नहीं होगा। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि इंडियन यूथ ब्रिगेड ने कंगारूओं के आगे श्रेष्ठ प्रदर्षन किया और मेहमानों को चारों खाने चित्त करते हुए मैच पर कब्जा जमाया। तीन मैचों की श्रृंखला का पहला मैच बारिष के कारण धुल गया था और दूसरा मैच इंडिया ने जीतकर 1-0 की बढ़त बना ली है। इस स्थिति में भारत के सिर पर से सीरीज हारने का खतरा तो नहीं रहा लेकिन गोवा में होने वाले तीसरे मैच को जीतकर टेस्ट के बाद एकदिवसीय श्रृंखला में क्लीन स्विप हासिल करने का प्रयास मेजबान टीम जरूर करेगी।

Wednesday, 12 May 2010

करवा ली मिट्टी पलीत
सुपर८ में सभी मुकाबले हारने वाली टीम रही इंडिया
लो जी करवा जी मिट्टी पलीत वेस्टइंडीज में। धुल गए विश्व विजेता बनाने के ख्वाब। लीग दौर के दोनों मुकाबले जीत कर इतराने वाली टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी सुपर ८ में एक के बाद एक तीनो मुकाबलों में मुह की खाने के बाद पतली गली तलाशने दौर में फंस गए है। इंडिया सुपर ८ में तीनों मुकाबले हारने वाली हारने वाली इकलौती टीम रही।
पूरे टूर्नामेंट में टीम इंडिया ने अगर कोई बड़ा मुकाबला जीता तो वह लीग दौर में साउथ अफ्रीका के खिलाफ। अफगानिस्तान जैसी नौसिखिया टीम के विरुद्ध जीत को कोई बड़ी उपलब्धि नहीं माना जा सकता। वही सुपर ८ में पहले ऑस्ट्रेलिया फिर वेस्टइंडीज और अब श्रीलंका के खिलाफ पराजय का मुह देखने के बाद टीम इंडिया की इस प्रतिस्पर्धा से शर्मनाक विदाई हुई है।
२००७ की विश्व विजेता इसके बाद अगले दो संस्करणों में कभी भी चेम्पियन की तरह प्रदशन करती नहीं दिखी और हर बार टीम का प्रदर्शन पिछले बार से लचर होता गया। इस बार न ही तो गेंदबाजी में धार दिखी और न ही बल्लेबाजो में वह आत्मविश्वाश, जोश और जज्बा देखने को मिला जिसके लिए टीम जानी जाती है। हर बार बल्लेबाजी ताश के पत्तो की तरह ढेर होती गयी और हर बार टीम ओंधे मुह गिरती गयी।
गौतम गंभीर, मुरली विजय, दिनेश कार्तिक, सुरेश रैना, रोहित शर्मा, युवराज सिंह, महेंद्र सिंह धोनी, युसूफ पठान और रविन्द्र जडेजा जैसे कागजी रत्नों से भरी टीम का एक भी रत्न पूरे टूर्नामेंट के दौरान प्रभाव नहीं छोड़ पाए।
कुल मिलाकर भारत अब प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गया है और इसकी जिम्मेदारी पूरी टीम को सयुंक्त रूप से लेनी होगी। टीम ने मैदान के हर क्षेत्र में लचर प्रदर्शन किया। टीम के कप्तान आई पी एल की लम्बी और थकान भरी पारी को को इश हार का जिम्मेदार बता रहे है जो की बेहद शर्मनाक है। शुद्ध व्यावसायिक मुकाबलों के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट को दाव पर लगा देना कहा की बुद्धिमानी है।
इस पूरे घटनाक्रम में टीम प्रबंधन की भी जिम्मेदारी है। टीम चयन में हुए गलतियों का फल भी टीम को भुगतना पड़ा। आई पी एक में श्रेष्ठतम प्रदर्शन करने वाले खिलाडियों को दरकिनार कर आउट ऑफ़ फॉर्म खिलाडियों को चुनना कहा तक सही था। अब भारत के लिए पूरे क्रम पर चिंतन और मनन करने के अलावा कुछ नहीं रह गया है। आगामी मुकाबलों में इन्ही गलतियों का दोहराव न हो इसके बारे में टीम और टीम प्रबंधन को सोचना होगा।

Saturday, 8 May 2010

बल्लेबाजों ने डुबोई टीम की लुटिया
बारबडोस में अपने पहले सुपर ८ मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के सामने घुटने टेकने के बाद टीम इंडिया के लिए सेमीफायनल की राह मुश्किल हो गयी है। अपनी बल्लेबाजी को अपनी ताकत बताने वाली टीम इंडिया को उनकी वही ताकत ले डूबी। मजबूत दिखने वाला बल्लेबाजी क्रम एक के बाद एक ताश के पत्तो की तरह ढेर होता गया और टीम इंडिया ने कंगारूओं के बेहतरीन खेल के आगे मूक समर्पण कर दिया।
वैसे देखे तो पूरे मेच के दौरान पलड़ा कभी भी भारत की और झुका नहीं दिखा। टॉस जीतने के बावजूद पहले बल्लेबाजी न करने का गलत फैसला लेने के बाद भारतीय एकादश का हर पैंतरा उलटा पड़ा और भारत को पराजय का मूह देखना पड़ा। पूरे मेच में गेंदबाजी की धार देखने को नहीं मिली और डेविड वार्नर और शेन वाटसन ने भारतीय गेंदबाजी की जमकर धज्जियां उड़ाई। वार्नर के ७२ और वाटसन के ५४ रनों की बदौलत टीम ने अपनी जीत की राह तय कर ली थी। नियत २० ओवरों में १८४ रन का मजबूत लक्ष्य देने के बाद कंगारुओं के दिल और दिमाग में सुकून आसानी से देखा जा सकता था।
लक्ष्य के पीछा करने उतारी टीम इंडिया के धुरंधर बल्लेबाजो का एक एक कर ताश के पत्तो की तरह ढेर हो जाना बेहद अविस्मर्णीय रहा। क्योंकि अमूमन ऐसा देखने को नहीं मिलता। कुल मिलाकर प्रतिद्वंदी गेंदबाजी की धार के आगे भारतीय बल्लेबाज छटपटा कर रह गए। ग्यारह में से ९ बल्लेबाजो का दहाई के आंकड़े को न छु पाना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण था। मुरली विजय, गौतम गंभीर, सुरेश रैना, युवराज सिंह, महेंद्र सिंह धोनी, युसूफ पठान और रविन्द्र जडेजा जैसे सूरमाओं के दहाई के आंकड़े को न छु पाना बेहद शर्मनाक था। मुरली विजय की एक और
असफल पारी ने उनके चयन पर एक बार फिर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। वही पिछले मेच के हीरो सुरेश रैना का अपनी पारी को न दोहरा पाना निराशाजनक रहा।
इस पराजय ने धोनी की बल्लेबाजी पर भी सवालिया निशाँ खड़ा कर दिया। पिछले तीन मेचो में धोनी का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को नहीं मिला। उसकी कप्तानी में एक के बाद एक कई गलतियां देखने को मिली जिनके कारण भारत बेक फुट पर जाता दिखाई दे रहा है। पहला मेच हारने के बाद भारत की सेमीफायनल की राह मुस्किल हो गयी है और टीम को अब के लिए शेष मेच करो या मरो के सामान हो गए है। टीम को आगामी दिनों में श्रीलंका और वेस्टइंडीज से भिड़ना है। अगर बल्लेबाजो ने इसी तरह लुटिया डुबोयी तो टीम के खिताबी स्वप्न चूर चूर हो जाएगा और इसके पिछले संस्करण की कहानी दोहराई जायेगी इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है।

Thursday, 6 May 2010

अब होगी श्रेष्ठ चार में पहुँचने की जंग
लीग दौर के ख़त्म होने के बाद भारत सहित दूसरी सात टीमो की नज़र अब सुपर ८ के रास्ते सेमी फ़ाइनल पर टिकी हुए है। लीग मैचो के दौरान किसी प्रकार का उलटफेर न होना भी अच्छा रहा क्योंकि इससे अच्छी टीमे अंत तक खिताबी दौड़ में शामिल रहेगी और सुपर ८ मुकाबलों में कमजोर टीम के हारने के कारण अच्छी टीम के समीकरण पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वैसे भी अफगानिस्तान, बंगलादेश, आयरलेंड और ज़िम्बाब्वे इस संस्करण की सबसे कमजोर टीमे थी और उनका खिताबी दौड़ से बाहर होना तय था।
खिताबी विश्व युद्ध के दूसरे दौर में ग्रुप ऐ से पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया, ग्रुप बी से श्रीलंका और न्यूजीलैंड, ग्रुप सी से भारत और दक्षिण अफ्रीका तथा ग्रुप दी से वेस्टइंडीज और इंग्लैंड ने अपना स्थान पक्का किया है और गुरूवार से इन टीमो के बीच सेमीफायनल में पहुँचने की हौड शुरू हो जायेगी।
भारत के परिपेक्ष्य में बात करे तो भारत को ७ मई को ऑस्ट्रेलिया, ९ मई को वेस्टइंडीज और ११ मई को श्रीलंका से दो दो हाथ होना है। टीमवार विश्लेषण करें तो पाएंगे की ऑस्ट्रेलिया, जोकि वनडे फोर्मेट की विश्वविजेता है, उससे मुकाबला बेहद रोमांचक और नजदीकी होने की सम्भावना है। वैसे बुधवार को बंगलादेश के सामने ऑस्ट्रलियाई बल्लेबाजी के उपरी क्रम की ताश के पत्तो की तरह ढेर हो जाने के बाद वे भारत जैसी मजबूत टीम के समक्ष मुकाबले को हलके में नहीं ले सकते। ऐसे में ब्रेट ली जैसे गेंदबाज का उनकी एकादश से बहार हो जाना उनके लिए नुक्सान का सौदा है। दूसरी और केरेबियाई टीम वेस्टइंडीज को घरेलू माहौल का लाभ मिलेगा। वही
मुकाबले की तीसरी टीम श्रीलंका के खिलाफ मुकाबला अपेक्षाकृत हल्का होने की संभावना व्यक्त की जा सकती है। खेर तीनो मैचो में नतीजा चाहे कुछ भी निकले लेकिन धोनी की सेना को हर चुनौती का डटकर मुकाबला करना होगा और ख़िताब की और एक और कदम बढ़ाना होगा। वैसे भारतीय परिपेक्ष्य में यह भी कहना उचित होगा की भारत का बल्लेबाजी पक्ष तो बेहद मजबूत है लेकिन गेंदबाजी में अभी तक वैसा पैनापन नहीं है जिसकी अपेक्षा आम क्रिकेट प्रेमी कर रहे है। वैसे साउथ अफ्रीका के खिलाफ ताबड़तोड़ शतक ठोंककर सुरेश रैना ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर दी। मुरली विजय ने अफगानिस्तान जैसी कमजोर टीम के सामने तो थोड़े हांथ दिखाए लेकिन अफ्रीका के सामने उसका न चलना उसकी प्रतिभा पर प्रश्न चिन्ह लगा गया। धोनी, गंभीर, युवराज, रविन्द्र जडेजा और युसूफ पठान को अभी तक अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करना बाकी है। वही गेंदबाजी में हरभजन भी अभी तक प्रभावित नहीं कर पाएं है।
वैसे इन सबके बीच एक बात और स्पष्ट हो गयी है की सुपर ८ में भी भारत के मुकाबला अपने चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान से नहीं होगा। इस मुकाबले की प्रतीक्षा हर क्रिकेट प्रेमी करता है। चलो, सेमी फायनल में इस मुकाबले की उम्मीद की जा सकती है। वैसे पाकिस्तान भी एक मजबूत टीम है और इस संस्करण के दोनों विश्व कप मुकाबलों में फायनल तक का सफ़र तय कर और दूसरे में खिताबी जीत हासिल कर उसने एक बार फिर मजबूत दावेदार के रूप में दस्तक दी है। इन सबके बीच साउथ अफ्रीका एक बार फिर अनलकी साबित न हो। बड़े मुकाबलों के सेमी फायनल और फायनल मुकाबले गवा देवे के अभिशाप से निकालने के लिए उसे धेर्य के साथ श्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। वैसे कालिस, स्मिथ, डुमिनी, डिविलियर्स जैसे बल्लेबाजो की बदौलत अफ्रीका दुनिया की किसी भी टीम को पटखनी दे सकती है।
कुल मिलाकर सफलता के रथ पर कौन सवार होता है, यह तो समय ही बताएगा लेकिन भारत, पाकिस्तान, साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसी प्रत्यक्ष दावेदारों के बीच कोई दूसरी टीम ख़िताब पर कब्ज़ा जमा ले, ऐसी संभावनाओ से भी इंकार नहीं किया जा सकता। मगर अभी सभी टीमो की नजर अगले दौर में पहुँचने की है। विश्व की चार श्रेष्ठ टीमै सेमीफायनल में ख़िताब मुकाबले के अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने का प्रयास करेगी और यही से निकलेगी नए विश्वविजेता एकादश।