Wednesday, 12 May 2010

करवा ली मिट्टी पलीत
सुपर८ में सभी मुकाबले हारने वाली टीम रही इंडिया
लो जी करवा जी मिट्टी पलीत वेस्टइंडीज में। धुल गए विश्व विजेता बनाने के ख्वाब। लीग दौर के दोनों मुकाबले जीत कर इतराने वाली टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी सुपर ८ में एक के बाद एक तीनो मुकाबलों में मुह की खाने के बाद पतली गली तलाशने दौर में फंस गए है। इंडिया सुपर ८ में तीनों मुकाबले हारने वाली हारने वाली इकलौती टीम रही।
पूरे टूर्नामेंट में टीम इंडिया ने अगर कोई बड़ा मुकाबला जीता तो वह लीग दौर में साउथ अफ्रीका के खिलाफ। अफगानिस्तान जैसी नौसिखिया टीम के विरुद्ध जीत को कोई बड़ी उपलब्धि नहीं माना जा सकता। वही सुपर ८ में पहले ऑस्ट्रेलिया फिर वेस्टइंडीज और अब श्रीलंका के खिलाफ पराजय का मुह देखने के बाद टीम इंडिया की इस प्रतिस्पर्धा से शर्मनाक विदाई हुई है।
२००७ की विश्व विजेता इसके बाद अगले दो संस्करणों में कभी भी चेम्पियन की तरह प्रदशन करती नहीं दिखी और हर बार टीम का प्रदर्शन पिछले बार से लचर होता गया। इस बार न ही तो गेंदबाजी में धार दिखी और न ही बल्लेबाजो में वह आत्मविश्वाश, जोश और जज्बा देखने को मिला जिसके लिए टीम जानी जाती है। हर बार बल्लेबाजी ताश के पत्तो की तरह ढेर होती गयी और हर बार टीम ओंधे मुह गिरती गयी।
गौतम गंभीर, मुरली विजय, दिनेश कार्तिक, सुरेश रैना, रोहित शर्मा, युवराज सिंह, महेंद्र सिंह धोनी, युसूफ पठान और रविन्द्र जडेजा जैसे कागजी रत्नों से भरी टीम का एक भी रत्न पूरे टूर्नामेंट के दौरान प्रभाव नहीं छोड़ पाए।
कुल मिलाकर भारत अब प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गया है और इसकी जिम्मेदारी पूरी टीम को सयुंक्त रूप से लेनी होगी। टीम ने मैदान के हर क्षेत्र में लचर प्रदर्शन किया। टीम के कप्तान आई पी एल की लम्बी और थकान भरी पारी को को इश हार का जिम्मेदार बता रहे है जो की बेहद शर्मनाक है। शुद्ध व्यावसायिक मुकाबलों के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट को दाव पर लगा देना कहा की बुद्धिमानी है।
इस पूरे घटनाक्रम में टीम प्रबंधन की भी जिम्मेदारी है। टीम चयन में हुए गलतियों का फल भी टीम को भुगतना पड़ा। आई पी एक में श्रेष्ठतम प्रदर्शन करने वाले खिलाडियों को दरकिनार कर आउट ऑफ़ फॉर्म खिलाडियों को चुनना कहा तक सही था। अब भारत के लिए पूरे क्रम पर चिंतन और मनन करने के अलावा कुछ नहीं रह गया है। आगामी मुकाबलों में इन्ही गलतियों का दोहराव न हो इसके बारे में टीम और टीम प्रबंधन को सोचना होगा।

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