Saturday, 8 May 2010

बल्लेबाजों ने डुबोई टीम की लुटिया
बारबडोस में अपने पहले सुपर ८ मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के सामने घुटने टेकने के बाद टीम इंडिया के लिए सेमीफायनल की राह मुश्किल हो गयी है। अपनी बल्लेबाजी को अपनी ताकत बताने वाली टीम इंडिया को उनकी वही ताकत ले डूबी। मजबूत दिखने वाला बल्लेबाजी क्रम एक के बाद एक ताश के पत्तो की तरह ढेर होता गया और टीम इंडिया ने कंगारूओं के बेहतरीन खेल के आगे मूक समर्पण कर दिया।
वैसे देखे तो पूरे मेच के दौरान पलड़ा कभी भी भारत की और झुका नहीं दिखा। टॉस जीतने के बावजूद पहले बल्लेबाजी न करने का गलत फैसला लेने के बाद भारतीय एकादश का हर पैंतरा उलटा पड़ा और भारत को पराजय का मूह देखना पड़ा। पूरे मेच में गेंदबाजी की धार देखने को नहीं मिली और डेविड वार्नर और शेन वाटसन ने भारतीय गेंदबाजी की जमकर धज्जियां उड़ाई। वार्नर के ७२ और वाटसन के ५४ रनों की बदौलत टीम ने अपनी जीत की राह तय कर ली थी। नियत २० ओवरों में १८४ रन का मजबूत लक्ष्य देने के बाद कंगारुओं के दिल और दिमाग में सुकून आसानी से देखा जा सकता था।
लक्ष्य के पीछा करने उतारी टीम इंडिया के धुरंधर बल्लेबाजो का एक एक कर ताश के पत्तो की तरह ढेर हो जाना बेहद अविस्मर्णीय रहा। क्योंकि अमूमन ऐसा देखने को नहीं मिलता। कुल मिलाकर प्रतिद्वंदी गेंदबाजी की धार के आगे भारतीय बल्लेबाज छटपटा कर रह गए। ग्यारह में से ९ बल्लेबाजो का दहाई के आंकड़े को न छु पाना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण था। मुरली विजय, गौतम गंभीर, सुरेश रैना, युवराज सिंह, महेंद्र सिंह धोनी, युसूफ पठान और रविन्द्र जडेजा जैसे सूरमाओं के दहाई के आंकड़े को न छु पाना बेहद शर्मनाक था। मुरली विजय की एक और
असफल पारी ने उनके चयन पर एक बार फिर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। वही पिछले मेच के हीरो सुरेश रैना का अपनी पारी को न दोहरा पाना निराशाजनक रहा।
इस पराजय ने धोनी की बल्लेबाजी पर भी सवालिया निशाँ खड़ा कर दिया। पिछले तीन मेचो में धोनी का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को नहीं मिला। उसकी कप्तानी में एक के बाद एक कई गलतियां देखने को मिली जिनके कारण भारत बेक फुट पर जाता दिखाई दे रहा है। पहला मेच हारने के बाद भारत की सेमीफायनल की राह मुस्किल हो गयी है और टीम को अब के लिए शेष मेच करो या मरो के सामान हो गए है। टीम को आगामी दिनों में श्रीलंका और वेस्टइंडीज से भिड़ना है। अगर बल्लेबाजो ने इसी तरह लुटिया डुबोयी तो टीम के खिताबी स्वप्न चूर चूर हो जाएगा और इसके पिछले संस्करण की कहानी दोहराई जायेगी इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है।

1 comment:

  1. balebaajo ki kamjori phir bharat ke liye muskilein paida kar sakti hai.
    -Rajesh kumar solanki

    ReplyDelete