अब होगी श्रेष्ठ चार में पहुँचने की जंग
लीग दौर के ख़त्म होने के बाद भारत सहित दूसरी सात टीमो की नज़र अब सुपर ८ के रास्ते सेमी फ़ाइनल पर टिकी हुए है। लीग मैचो के दौरान किसी प्रकार का उलटफेर न होना भी अच्छा रहा क्योंकि इससे अच्छी टीमे अंत तक खिताबी दौड़ में शामिल रहेगी और सुपर ८ मुकाबलों में कमजोर टीम के हारने के कारण अच्छी टीम के समीकरण पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वैसे भी अफगानिस्तान, बंगलादेश, आयरलेंड और ज़िम्बाब्वे इस संस्करण की सबसे कमजोर टीमे थी और उनका खिताबी दौड़ से बाहर होना तय था।
खिताबी विश्व युद्ध के दूसरे दौर में ग्रुप ऐ से पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया, ग्रुप बी से श्रीलंका और न्यूजीलैंड, ग्रुप सी से भारत और दक्षिण अफ्रीका तथा ग्रुप दी से वेस्टइंडीज और इंग्लैंड ने अपना स्थान पक्का किया है और गुरूवार से इन टीमो के बीच सेमीफायनल में पहुँचने की हौड शुरू हो जायेगी।
भारत के परिपेक्ष्य में बात करे तो भारत को ७ मई को ऑस्ट्रेलिया, ९ मई को वेस्टइंडीज और ११ मई को श्रीलंका से दो दो हाथ होना है। टीमवार विश्लेषण करें तो पाएंगे की ऑस्ट्रेलिया, जोकि वनडे फोर्मेट की विश्वविजेता है, उससे मुकाबला बेहद रोमांचक और नजदीकी होने की सम्भावना है। वैसे बुधवार को बंगलादेश के सामने ऑस्ट्रलियाई बल्लेबाजी के उपरी क्रम की ताश के पत्तो की तरह ढेर हो जाने के बाद वे भारत जैसी मजबूत टीम के समक्ष मुकाबले को हलके में नहीं ले सकते। ऐसे में ब्रेट ली जैसे गेंदबाज का उनकी एकादश से बहार हो जाना उनके लिए नुक्सान का सौदा है। दूसरी और केरेबियाई टीम वेस्टइंडीज को घरेलू माहौल का लाभ मिलेगा। वही
मुकाबले की तीसरी टीम श्रीलंका के खिलाफ मुकाबला अपेक्षाकृत हल्का होने की संभावना व्यक्त की जा सकती है। खेर तीनो मैचो में नतीजा चाहे कुछ भी निकले लेकिन धोनी की सेना को हर चुनौती का डटकर मुकाबला करना होगा और ख़िताब की और एक और कदम बढ़ाना होगा। वैसे भारतीय परिपेक्ष्य में यह भी कहना उचित होगा की भारत का बल्लेबाजी पक्ष तो बेहद मजबूत है लेकिन गेंदबाजी में अभी तक वैसा पैनापन नहीं है जिसकी अपेक्षा आम क्रिकेट प्रेमी कर रहे है। वैसे साउथ अफ्रीका के खिलाफ ताबड़तोड़ शतक ठोंककर सुरेश रैना ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर दी। मुरली विजय ने अफगानिस्तान जैसी कमजोर टीम के सामने तो थोड़े हांथ दिखाए लेकिन अफ्रीका के सामने उसका न चलना उसकी प्रतिभा पर प्रश्न चिन्ह लगा गया। धोनी, गंभीर, युवराज, रविन्द्र जडेजा और युसूफ पठान को अभी तक अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करना बाकी है। वही गेंदबाजी में हरभजन भी अभी तक प्रभावित नहीं कर पाएं है।
वैसे इन सबके बीच एक बात और स्पष्ट हो गयी है की सुपर ८ में भी भारत के मुकाबला अपने चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान से नहीं होगा। इस मुकाबले की प्रतीक्षा हर क्रिकेट प्रेमी करता है। चलो, सेमी फायनल में इस मुकाबले की उम्मीद की जा सकती है। वैसे पाकिस्तान भी एक मजबूत टीम है और इस संस्करण के दोनों विश्व कप मुकाबलों में फायनल तक का सफ़र तय कर और दूसरे में खिताबी जीत हासिल कर उसने एक बार फिर मजबूत दावेदार के रूप में दस्तक दी है। इन सबके बीच साउथ अफ्रीका एक बार फिर अनलकी साबित न हो। बड़े मुकाबलों के सेमी फायनल और फायनल मुकाबले गवा देवे के अभिशाप से निकालने के लिए उसे धेर्य के साथ श्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। वैसे कालिस, स्मिथ, डुमिनी, डिविलियर्स जैसे बल्लेबाजो की बदौलत अफ्रीका दुनिया की किसी भी टीम को पटखनी दे सकती है।
कुल मिलाकर सफलता के रथ पर कौन सवार होता है, यह तो समय ही बताएगा लेकिन भारत, पाकिस्तान, साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसी प्रत्यक्ष दावेदारों के बीच कोई दूसरी टीम ख़िताब पर कब्ज़ा जमा ले, ऐसी संभावनाओ से भी इंकार नहीं किया जा सकता। मगर अभी सभी टीमो की नजर अगले दौर में पहुँचने की है। विश्व की चार श्रेष्ठ टीमै सेमीफायनल में ख़िताब मुकाबले के अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने का प्रयास करेगी और यही से निकलेगी नए विश्वविजेता एकादश।
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